महाभारत के युद्ध में अगर कोई ऐसा योद्धा था जिसके साथ नियति ने पल-पल छल किया, तो वह थे सूर्यपुत्र कर्ण। जन्म लेते ही माँ ने त्याग दिया, गुरुओं ने श्राप दिया, और अंत में युद्ध भूमि में स्वयं ईश्वर (श्री कृष्ण) ने भी छल से उसका वध करवाया।
यह कविता कर्ण के उसी दर्द और आक्रोश को बयां करती है। इसमें कर्ण भगवान कृष्ण, अपनी माँ कुंती, पिता सूर्यदेव और गुरु द्रोण से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। पढ़िए यह ओजस्वी और भावुक कर देने वाली कविता।
कविता: रणभूमि में छल करते हो तुम कैसे भगवान हुए
सारा जीवन शापित-शापित, हर रिश्ता बेनाम कहो
ओ मुझको ही छलने के खातिर, मुरली वाले श्याम कहो
तो किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती,
कैसे-कैसे इंसान हुए
अरे रणभूमि में छल करते हो,
तुम कैसे भगवान हुए?
1. माँ कुंती के लिए कर्ण का प्रश्न
मन कहता है,
मन करता है,
कुछ तो माँ के नाम लिखूं
और एक मेरी जननी को लिख दूं,
एक धरती के नाम लिखूं
तो प्रश्न बड़ा है,
मौन खड़ा,
धरती संताप नहीं देती
अरे धरती मेरी माँ होती तो,
मुझको श्राप नहीं देती
तो जननी माँ को वचन दिया,
पांडव का काल नहीं हूँ मैं
अरे जो बेटा गंगा में छोड़े,
उस कुंती का लाल नहीं हूँ
मैं तो क्या लिखना इन्हें प्रेम की पाती,
जो मेरी ना पहचान हुए अरे रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए?
2. पिता सूर्यदेव के लिए
सारे जग का तम हरते,
बेटे का तम ना हर पाए
और इंद्र ने विषम से कपट किए,
बस तुम ही सम ना कर पाए
तो अर्जुन की सौगंध की खातिर,
बादल ओट छिपे थे तुम
और श्री कृष्ण के एक इशारे,
कुछ पल अधिक रुके थे तुम
अरे दो पल जो तुम रुक जाते तो,
अपना शौर्य दिखा देता मुरली वाले के सम्मुख, अर्जुन का शीश गिरा देता
तो बेटे का जीवन हरते हो, तुम कैसे दिनमान हुए? अरे रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए?
3. गुरु द्रोणाचार्य और परशुराम के लिए
पक्षपात का चक्रव्यूह क्यों, द्रोण नहीं तुमसे टूटा
और सर्वश्रेष्ठ अर्जुन ही हो, बस मोह नहीं तुमसे छूटा
तो एकलव्य का लिया अंगूठा, मुझको सूत बताते हो
अरे खुद दोने में जन्म लिया, और मुझको जात दिखाते हो
देकर भी जो ज्ञान बुलाया, कैसा शिष्टाचार किया अरे दानवीर इस सूर्य पुत्र को,
तुमने जिंदा मार दिया फिर भी तुमको ही पूजा है,
तुम ही बस सम्मान हुए अरे रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए?
निष्कर्ष (Conclusion)
यह कविता हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि धर्म और अधर्म के युद्ध में एक 'दानवीर' को हराने के लिए ईश्वर को भी छल का सहारा लेना पड़ा। कर्ण का त्याग और संघर्ष उन्हें महाभारत का सबसे महान पात्र बनाता है।
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