हनुमान के होते प्रभु आपने सोच लिया यह कैसे कि Lyrics in Hindi
Lyrics & Track Info

हनुमान के होते प्रभु आपने सोच लिया यह कैसे कि Lyrics in Hindi

Table of Contents

    हनुमान के होते प्रभु आपने सोच लिया यह कैसे कि | शक्तिशाली वीर रस हनुमान संवाद लिरिक्स (Full Song Lyrics)

    रामचरितमानस और रामायण के कई प्रसंग हमारे दिलों में भक्ति और शौर्य जगा देते हैं। ऐसा ही एक सबसे भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाला प्रसंग तब आता है, जब मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते हैं। प्रभु श्री राम को विलाप करते देख, परम भक्त हनुमान जी का शौर्य और संकल्प जाग उठता है।

    सोशल मीडिया (Instagram Reels और YouTube Shorts) पर वायरल हो रहे इस बेहद शक्तिशाली वीर रस संवाद और रैप सॉन्ग (Hanuman Samvad & Rap Lyrics) को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। यहाँ इस अद्भुत कविता और पूरे रैप गीत के लिरिक्स और उसका भावार्थ दिया गया है।

    हनुमान के होते प्रभु आपने सोच लिया यह कैसे कि

    1. Hanuman Shaurya Samvad Full Lyrics (हिंदी में)

    "हनुमान के होते प्रभु आपने सोच लिया यह कैसे कि!! 🚩
    "यमराज आज स्वयं प्राण हमारे लक्ष्मण जी के ले लेंगे!! 🚩
    "क्या नहीं भरोसा आपको आपके दास की शक्ति पे प्रभु!! 🚩
    "मैं पृथ्वी उथल-पुथल कर दूँ आप एक बार जो कह देंगे!! 🚩

    "हाँ, आज अगर हो आज्ञा तो विधि का हर विधान पलट दूँ!! 🚩
    "आप कहो संजीवनी क्या मैं चंद्र निचोड़ के अमृत ला दूँ!! 🚩
    "काल हो चाहे सामने आज ना लखन को कुछ होने दूँगा!! 🚩
    और आप कहते हो मौत आएगी मैं मौत के प्राण ही ले लूँगा!! 🚩

    "अरे शक्ति ना मेरी काम की जो ना काम आए मेरे राम के!! 🚩
    आज तो लंकापति भी हाथ की क्षमता देखेगा हनुमान की!! 🚩
    "हाँ वो सूर्यदेव तो जानते हैं बजरंगी के निश्चय की क्षमता!! 🚩
    "गर आज हुए वो उदय तो पृथ्वी का अंतिम सूर्योदय होगा!! 🚩

    अस्त होंगे, वो त्रस्त होंगे मेरी क्रोध की अग्नि में भस्म होंगे!! 🚩
    वो, बाल्यकाल में तो ग्रास ले छोड़ा अब तो पूरे नष्ट होंगे वो!! 🚩
    "निश्चिंत रहिए आप प्रभु अभी जीवित है यह दास प्रभु!! 🚩
    "मैं भोर से पहले ले आऊँ संजीवनी आपके पास प्रभु!! 🚩

    "हाँ, गाड़ के पैर और ले छलांग रख पीठ गदा, चले हनुमान!! 🚩
    धूँजी धरती, प्रलय हो जैसे और आकाश में गूँजे जय श्री राम!! 🚩

    2. "खबर सुनी जब बजरंगि की" 

    खबर सुनी जब बजरंगि की, हिल गई लंका लंकेशवर की! 🚩
    सुबह से पहले हनुमान ही, ला सकता संजीवनी बूटी की! 🚩
    उसकी था नहीं, वो तो मृत्यु से भी डरता नहीं है! 🚩
    ना मरकट वो साधारण, उसके जैसा कोई दूजा नहीं! 🚩

    हाँ घबराया दशानन भी, भेजा कालनेमी को मार्ग में उनके! 🚩
    तो राम नाम जपता हूं साधु बन हनुमान रुके! 🚩
    नाम राम का सुनकर, छल से मार देगा कालनेमी हनुमान को! 🚩
    रावण सोच लगाई, बजरंगि ने एक प्रहार से दैत्य फाड़ फेंका लंका की सभा में! 🚩

    रावण आज तू बाधा भेजा, एक से भी तू ज्यादा भेजा! 🚩
    सौगंध मुझे हर राम की, लंका लौटूंगा बूटी समेत ना किया विलंब! 🚩
    द्रोणागिरी संजीवनी बूटी को ना जाने दे, गाढ़ के हाथ धरा में चले! 🚩
    उखाड़ पर्वत एक हाथ से, माथे पे एक बूंद पसीना, चेहरे पे कोई एक शिकन ना! 🚩

    एक हाथ में गदा एक में पर्वत, पर मुस्कान रुके ना! 🚩
    चले मारुति वायु गति से, क्षण भर में ही पहुंच गए लंका! 🚩
    प्राण बचाए लक्ष्मण के, फिर से बजा दिया राम नाम का डंका! 🚩
    हर्ष राम भेटेऊ हनुमाना, कृतज्ञ रूप परम सुजाना! 🚩

    तुरत बैद तब की नहीं उपाई, उठी बैठ लक्ष्मण हरषाई! 🚩
    ह्रदय लाई प्रभु भेटेऊ भ्राता, हर्ष सकल भालू कपि भ्राता! 🚩
    कभी मुनि बैद तहां बहु दावा, जेहि विधि तब हित आई लई आवा! 🚩

    राम राम जप ती हनुमान, अतुलित बल धाम हनुमान! 🚩
    राम राम जप ती हनुमान, अतुलित बल धाम हनुमान! 🚩
    हनुमान महाकाल शंभर... 🚩

    इस संवाद और रैप गीत का गहरा अर्थ और प्रसंग (Explanation)

    यह पंक्तियाँ और रैप गीत हनुमान जी के उस विराट रूप, कालनेमी वध, और अटूट विश्वास को दर्शाती हैं, जहाँ वो अपने आराध्य प्रभु श्री राम के दुःख को दूर करने के लिए हर बाधा को चीरकर आगे बढ़ जाते हैं।

    • काल और यमराज को चुनौती: हनुमान जी कहते हैं कि मेरे रहते यमराज की भी यह मजाल नहीं कि वो लक्ष्मण जी के प्राण छू सकें। अगर प्रभु आज्ञा दें, तो वह विधाता की लिखी को भी बदल सकते हैं।
    • कालनेमी का छल और उसका अंत: रावण द्वारा भेजे गए मायावी कालनेमी के षड्यंत्र को हनुमान जी तुरंत भांप लेते हैं और एक ही प्रहार से उसका अंत कर देते हैं।
    • सूर्यदेव और संजीवनी प्रसंग: संजीवनी बूटी सूर्योदय से पहले लानी थी। हनुमान जी बिना एक पल गंवाए द्रोणागिरी पर्वत को उखाड़कर वायु गति से लंका पहुंचते हैं और लक्ष्मण जी के प्राण बचाते हैं।
    • अटूट राम भक्ति: अंत में हनुमान जी पूरी ताकत से जय श्री राम का उद्घोष करते हुए प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी से मिलते हैं, जिससे पूरी सेना में हर्षोल्लास छा जाता है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    यह संवाद और रैप गीत सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि यह भक्ति, शक्ति, निष्ठा और संकल्प की पराकाष्ठा है। जब भी कोई भक्त इस वीर रस कविता को सुनता है, उसका मन "जय श्री राम" और "जय बजरंगी" के नारों से गूँज उठता है।

    आपको हनुमान जी का यह रौद्र और वीर रस रूप कैसा लगा? हमें नीचे Comment करके जरूर बताएं और इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ Share करें!

    जय श्री राम! जय हनुमान!

    Comments