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श्री कृष्ण भजन | त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है लिरिक्स इन हिन्दी - lyricsgana.in

त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है|

त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है
Image Credit by: Tilak
निर्माता: रामानंद सागर/सुभाष सागर/प्रेण सागर
निर्देशक: रामानंद सागर / आनंद सागर / मोती सागर
मुख्य सहायक निर्देशक: योगी योगिन्दर
सहायक निर्देशक: राजेंद्र शुक्ला / श्रीधर जेट्टी / ज्योति सागर
पटकथा और संवाद: रामानंद सागर
कैमरा: अविनाश सतोस्कर
संगीत: रवींद्र जैन
गीतकार: रवींद्र जैन
पार्श्व गायक: सुरेश वाडकर / हेमलता / रवींद्र जैन / अरविंदर सिंह / सुशील
संपादक: गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर मिश्रा / सहदेव

त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है

हाथ में चावल लेते ही, सब में दर भयो जात| 
जाने अब किस लोक की सम्पति होये समाप्त ||   
सब में दर भयो जात| 

हर दाने का मोल अगर देने लगे भगवान | 
रह जायेगा सृस्टि में बस एक ही धनवान ||
बस एक ही धनवान ||

प्रेम के भूंखे, प्रेम के तंदुल, प्रेम के भाव से खाने लगे है| 
प्रेम के भूंखे, प्रेम के तंदुल, प्रेम के भाव से खाने लगे है|


तंदुल के दानो में, दीन का दिनया दररद्र चबाने लगे है|
तंदुल के दानो में, दीन का दिनया दररद्र चबाने लगे है|
एक एक मुठ्ठी में एक एक लोक,
एक एक मुठ्ठी में एक एक लोक, सुदामा के भाग्य में जाने लगे है||

एक एक मुठ्ठी में एक एक लोक, सुदामा के भाग्य में जाने लगे है
त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है|
त्रिभुवन पति की देख उदारता, तीनो भवन थर्राने लगे है


पहली मुट्ठी देते ही प्रभु ने स्वर्ग सुदामा के नाम किया है 
दूसरी मुठ्ठी में पृथ्वी लोक का वैभव विप्र को सौप दिया है|| 
तीसरी मुठ्ठी में देने लगे है,
तीसरी मुठ्ठी में देने लगे है जो वैकुण्ठ तो लक्ष्मी ने रोक लिया है 
तीसरी मुठ्ठी में देने लगे है जो वैकुण्ठ तो लक्ष्मी ने रोक लिया है || 
अपना निवास भी दान में दे रहा है 
कैसा दानी ये मेरा पिया है 
अपना निवास भी दान में दे रहा है 
 कैसा दानी ये मेरा पिया है
***********जय श्री राधे*********** 
                           

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